मोकामा में जनसुराज समर्थक की हत्या से सियासी भूचाल — अनंत सिंह समेत पांच पर FIR

पटना: बिहार की राजनीति में एक बार फिर बाहुबली छवि और चुनावी हिंसा चर्चा के केंद्र में आ गई है। मोकामा विधानसभा क्षेत्र में गुरुवार को जनसुराज पार्टी के प्रत्याशी पीयूष प्रियदर्शी के समर्थक दुलारचंद यादव की हत्या ने पूरे राज्य की सियासत को गर्मा दिया है। इस हत्या के मामले में जेडीयू प्रत्याशी अनंत सिंह, उनके भतीजे रणवीर सिंह, कर्मवीर सिंह, करीबी छोटन सिंह, कंजय सिंह समेत कई अज्ञात लोगों के खिलाफ नामजद एफआईआर दर्ज की गई है।

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मृतक के पोते नीरज कुमार के आवेदन पर दर्ज FIR में कहा गया है कि गुरुवार दोपहर करीब साढ़े तीन बजे बसामाचक गांव में जनसुराज प्रत्याशी के प्रचार के दौरान अनंत सिंह अपने समर्थकों के साथ पहुंचे। उन्होंने दुलारचंद को गाली दी, जिस पर वृद्ध नेता ने विरोध किया। इसी दौरान रणवीर और कर्मवीर ने दुलारचंद को गाड़ी से खींचकर बाहर निकाला। आरोप है कि अनंत सिंह ने अपनी कमर से पिस्टल निकालकर गोली चलाई, जो दुलारचंद के पैर में लगी। इसके बाद उनके सहयोगियों ने लाठी-डंडों से पिटाई की और गाड़ी चढ़ाकर फरार हो गए। घायल दुलारचंद को अस्पताल ले जाया गया, जहां डॉक्टरों ने उन्हें मृत घोषित कर दिया।

 

घटना की जानकारी मिलते ही इलाके में तनाव फैल गया। पुलिस ने मौके पर पहुंचकर हालात काबू में किए। जिलाधिकारी त्यागराजन एस.एम. ने बताया कि मोकामा क्षेत्र के घोसवरी टाल इलाके में दो प्रत्याशियों के समर्थकों के बीच झड़प हुई, जिसमें दुलारचंद की मौत संदेहास्पद परिस्थितियों में हुई। उन्होंने यह भी बताया कि दुलारचंद पहले से कई आपराधिक मामलों में अभियुक्त रहे हैं। पुलिस ने छापेमारी शुरू कर दी है और सभी आरोपियों की तलाश की जा रही है।

 

वहीं, अनंत सिंह ने अपने ऊपर लगे आरोपों को पूरी तरह खारिज किया है। उन्होंने कहा, “यह सब सूरजभान सिंह की साजिश है। मैं टाल इलाके में जनसंपर्क के लिए गया था। हमारी गाड़ियां आगे निकल गई थीं। पीछे कुछ गाड़ियों पर हमला हुआ। इसमें मेरा कोई हाथ नहीं है। मुझे फंसाने की कोशिश की जा रही है।”

 

दूसरी ओर, तेजस्वी यादव ने इस हत्या को लेकर नीतीश सरकार और एनडीए पर तीखा हमला बोला। उन्होंने कहा, “लोकतंत्र में हिंसा का कोई स्थान नहीं है। यह जनहित की लड़ाई है, गोलियों और बमों की नहीं। एनडीए के शासन में अपराधी तांडव मचा रहे हैं। बाहुबलियों को टिकट देकर बिहार को बदनाम किया जा रहा है।”

 

तेजस्वी ने आगे कहा कि एनडीए प्रत्याशियों का व्यवहार लोकतांत्रिक मर्यादाओं के खिलाफ है। उन्होंने केंद्र और राज्य सरकार पर “अपराधियों को संरक्षण देने” का भी आरोप लगाया।

 

जनसुराज संस्थापक प्रशांत किशोर ने कहा कि पार्टी के प्रतिनिधि मौके पर भेजे गए हैं और विस्तृत जानकारी मिलने के बाद आधिकारिक बयान जारी किया जाएगा।

 

राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि यह घटना बिहार की पुरानी बाहुबली राजनीति की वापसी का संकेत है। मोकामा सीट हमेशा से विवादों में रही है, जहां बाहुबली नेताओं का प्रभाव रहा है। कभी लालू प्रसाद यादव के करीबी रहे दुलारचंद यादव 90 के दशक में बाढ़ और टाल इलाके में प्रभावशाली माने जाते थे।

 

कुल मिलाकर, मोकामा की यह घटना चुनावी हिंसा, व्यक्तिगत दुश्मनी और राजनीतिक साजिश का मिश्रण प्रतीत होती है। पुलिस जांच के निष्पक्ष और पारदर्शी होने से ही यह तय हो पाएगा कि यह हत्या राजनीतिक प्रतिद्वंद्विता का नतीजा थी या साजिश के तहत किया गया अपराध। फिलहाल, इस वारदात ने बिहार चुनाव को नया मोड़ दे दिया है और एनडीए पर दबाव बढ़ा दिया है।