रांची: झारखंड में नशा तस्करों के खिलाफ पुलिस की कार्रवाई भले ही बड़े पैमाने पर चल रही हो, लेकिन जांच और साक्ष्य संरक्षण में लापरवाही के कारण कई मामले अदालत में दम तोड़ते नजर आ रहे हैं। रांची के ओरमांझी में 200 किलो गांजा चूहों द्वारा नष्ट किए जाने का मामला अभी ठंडा भी नहीं पड़ा था कि अब नामकुम थाना से जुड़ा एक और चौंकाने वाला मामला सामने आया है, जहां डोडा चूर्ण चूहों की भेंट चढ़ गया और आरोपी अदालत से बरी हो गए।

यह पूरा मामला 31 मई 2019 की रात का है। नामकुम पुलिस को गुप्त सूचना मिली थी कि कोलाड गांव के पास बड़े पैमाने पर डोडा की तस्करी की जा रही है। सूचना के आधार पर पुलिस ने छापेमारी कर कार्तिक महतो और चुरू लोहरा को गिरफ्तार किया था। पुलिस का दावा था कि आरोपियों के वाहनों से 45 बोरी डोडा चूर्ण जब्त किया गया, जिसका कुल वजन करीब 675 से 836 किलोग्राम के बीच था।
मामला जब अदालत पहुंचा तो पुलिस की गंभीर लापरवाही उजागर हो गई। अदालत को बताया गया कि जब्त किए गए 45 बोरे डोडा चूर्ण को खुले आसमान के नीचे रखा गया था, जिसके कारण वह खराब हो गया। इतना ही नहीं, फॉरेंसिक साइंस लैब (FSL) के सैंपल रखे गए प्लास्टिक बॉक्स को भी चूहों ने कुतर डाला। बताया गया कि चार बॉक्स चूहों की चपेट में आए, जिनमें से केवल एक बॉक्स ही सील अवस्था में था।
इसके अलावा पुलिस द्वारा पेश किए गए गवाह भी आरोपियों के खिलाफ आरोप साबित करने में नाकाम रहे। नतीजतन, साक्ष्यों के अभाव और गंभीर प्रक्रियात्मक खामियों को देखते हुए अदालत ने दोनों आरोपियों को बरी कर दिया।
इस फैसले के बाद पुलिस की कार्यप्रणाली पर एक बार फिर सवाल खड़े हो गए हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि यदि जब्त मादक पदार्थों का सही तरीके से संरक्षण और साक्ष्य प्रबंधन किया जाता, तो इतना बड़ा मामला अदालत में कमजोर नहीं पड़ता। लगातार सामने आ रहे ऐसे मामलों ने नशा तस्करी के खिलाफ चल रही मुहिम की गंभीरता पर भी प्रश्नचिह्न लगा दिया है।