रांची में ईडी–पुलिस आमने-सामने, पेयजल घोटाले की जांच ने लिया नया मोड़

रांची: झारखंड में प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) और राज्य पुलिस के बीच एक बार फिर टकराव की स्थिति बन गई है। पेयजल घोटाले की जांच के दौरान गुरुवार 15 जनवरी की सुबह रांची पुलिस की एक टीम दलबल के साथ एयरपोर्ट रोड स्थित ईडी कार्यालय पहुंची। पुलिस यहां पेयजल घोटाले के अभियुक्त संतोष कुमार द्वारा ईडी अधिकारियों पर लगाए गए मारपीट के आरोपों की जांच और पूछताछ के लिए पहुंची है।

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पुलिस के ईडी कार्यालय पहुंचने के साथ ही परिसर के बाहर केंद्रीय सुरक्षा बल (CSF) के जवानों की तैनाती कर दी गई, जबकि अंदर पुलिस की मौजूदगी ने माहौल को तनावपूर्ण बना दिया। दोनों एजेंसियों की आमने-सामने की स्थिति ने एक बार फिर राज्य में केंद्र और राज्य एजेंसियों के बीच अधिकारों की खींचतान को उजागर कर दिया है।

 

यह पहला मौका नहीं है जब झारखंड में ईडी और राज्य पुलिस के बीच विवाद सामने आया हो। इससे पहले अवैध खनन और साहिबगंज टोल टेंडर घोटाले की जांच के दौरान भी दोनों एजेंसियां आमने-सामने आ चुकी हैं। राज्य सरकार ने केंद्रीय एजेंसियों की पूछताछ और कार्रवाई को लेकर एक मानक संचालन प्रक्रिया (SOP) भी बनाई थी, जिसे ईडी ने संसद से मिले अपने अधिकारों का उल्लंघन बताते हुए खारिज कर दिया था।

 

भूमि घोटाले की जांच के दौरान भी ईडी अधिकारियों पर रिश्वत मांगने के आरोप लगे थे, जिसके बाद पुलिसिया कार्रवाई हुई और मामला झारखंड हाईकोर्ट तक पहुंचा। उस समय ईडी ने अपने खिलाफ दर्ज प्राथमिकियों की जांच सीबीआई से कराने की मांग की थी।

 

ताजा विवाद की जड़ पेयजल घोटाले के मुख्य अभियुक्त संतोष कुमार की शिकायत है। संतोष कुमार ने आरोप लगाया है कि पूछताछ के दौरान ईडी अधिकारियों ने उसके साथ मारपीट की और कुछ साक्ष्यों को मिटाने का प्रयास किया। इसी शिकायत के आधार पर रांची पुलिस अब ईडी अधिकारियों की भूमिका और कार्यशैली की जांच में जुटी है।

 

एक ओर जहां ईडी पेयजल घोटाले में कथित तौर पर ऊंची पहुंच रखने वाले लोगों की भूमिका की जांच कर रही है, वहीं दूसरी ओर राज्य पुलिस केंद्रीय एजेंसी के अधिकारियों के खिलाफ लगे आरोपों की पड़ताल कर रही है। एजेंसियों के बीच यह टकराव झारखंड की राजनीति और प्रशासनिक गलियारों में चर्चा का बड़ा विषय बना हुआ है। अब सबकी नजर इस बात पर है कि यह विवाद कानूनी रूप से किस दिशा में आगे बढ़ता है और इसका असर घोटाले की जांच पर कितना पड़ता है।