जमशेदपुर को औद्योगिक नगर घोषित किए जाने को लेकर दशकों से चला आ रहा विवाद एक बार फिर सुर्खियों में आ गया है। गुरुवार को इस मामले की सुनवाई के दौरान सुप्रीम कोर्ट ने सख्त रुख अपनाते हुए केंद्र सरकार को नोटिस जारी किया और चार सप्ताह के भीतर स्पष्ट जवाब दाखिल करने का निर्देश दिया। खास बात यह है कि करीब 40 साल पुराने इस विवाद में यह पहला मौका है, जब केंद्र सरकार को औपचारिक रूप से प्रतिवादी बनाया गया है।

संविधान पीठ में सुनवाई, केंद्र की भूमिका पर सवाल
इस अहम मामले की सुनवाई मुख्य न्यायाधीश न्यायमूर्ति संजीव खन्ना, न्यायमूर्ति संजय कुमार और न्यायमूर्ति के.वी. विश्वनाथन की पीठ ने की। अदालत ने कहा कि इतने लंबे समय से लंबित मामले में केंद्र सरकार की भूमिका और रुख जानना जरूरी है। इसी के तहत केंद्र से जवाब तलब किया गया है।
1988 से जारी है कानूनी लड़ाई
जमशेदपुर में नगर निगम गठन और औद्योगिक नगर की अधिसूचना को लेकर यह विवाद वर्ष 1988 से चला आ रहा है। वर्ष 1989 में स्थानीय नागरिकों और संगठनों ने याचिकाएं दायर कर औद्योगिक नगर घोषित किए जाने के संवैधानिक और प्रशासनिक पहलुओं को चुनौती दी थी। तब से यह मामला विभिन्न न्यायिक चरणों से गुजरता रहा है।
झारखंड सरकार की अधिसूचना बनी विवाद की जड़
झारखंड सरकार ने 28 दिसंबर 2023 को जमशेदपुर को इंडस्ट्रियल टाउन घोषित करने की अधिसूचना जारी की थी। इस फैसले को झारखंड हाईकोर्ट में चुनौती दी गई, जहां से मामला आगे सुप्रीम कोर्ट पहुंचा। याचिकाकर्ताओं का कहना है कि इस निर्णय से शहर में नगर निगम का गठन नहीं हो पाएगा, जिससे नागरिकों के लोकतांत्रिक अधिकार प्रभावित होंगे।
मतदान और प्रतिनिधित्व पर असर का दावा
याचिकाओं में तर्क दिया गया है कि यदि जमशेदपुर को औद्योगिक नगर के रूप में बनाए रखा गया, तो नगर निगम चुनाव नहीं होंगे। इससे स्थानीय नागरिकों के मतदान अधिकार और निर्वाचित प्रतिनिधित्व पर सीधा असर पड़ेगा। इसी आधार पर औद्योगिक नगर की अवधारणा को चुनौती दी गई है।
केंद्र के जवाब के बाद तय होगी आगे की दिशा
सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र सरकार को चार सप्ताह का समय देते हुए कहा है कि उसके जवाब के बाद मामले की आगे सुनवाई की जाएगी। अदालत ने संकेत दिए हैं कि इतने वर्षों से लंबित इस विवाद का अब निर्णायक समाधान जरूरी है।
गौरतलब है कि जमशेदपुर को लेकर औद्योगिक नगर और नगर निगम के बीच का यह विवाद सिर्फ प्रशासनिक नहीं, बल्कि सीधे तौर पर नागरिक अधिकारों से जुड़ा हुआ है। सुप्रीम कोर्ट द्वारा केंद्र सरकार को नोटिस देना इस पूरे मामले को नई दिशा देता है। अब सभी की निगाहें केंद्र के जवाब पर टिकी हैं, जिससे यह तय होगा कि जमशेदपुर का प्रशासनिक भविष्य किस दिशा में आगे बढ़ेगा।