जमशेदपुर में युवा उद्यमी कैरव गांधी अपहरण कांड: 11 दिन बाद भी सुराग नहीं, फिरौती 10 करोड़ तक बढ़ी

जमशेदपुर : शहर के बिष्टुपुर सीएच एरिया निवासी युवा उद्यमी कैरव गांधी के अपहरण को 11 दिन बीत चुके हैं, लेकिन अब तक उनकी सुरक्षित बरामदगी नहीं हो सकी है। 13 जनवरी को कदमा–सोनारी लिंक रोड के पास फिल्मी अंदाज में सफेद स्कॉर्पियो सवार बदमाशों ने उन्हें अगवा कर लिया था। इस सनसनीखेज वारदात के बाद से पूरे शहर में दहशत का माहौल है और परिजन गहरे भय व अनिश्चितता के दौर से गुजर रहे हैं।

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कैरव गांधी, शहर के जाने-माने कारोबारी देवांग गांधी के पुत्र हैं। पुलिस सूत्रों के मुताबिक, अपहरणकर्ताओं ने शुरुआत में 5 करोड़ रुपये की फिरौती मांगी थी, जिसे बाद में बढ़ाकर 10 करोड़ रुपये कर दिया गया। शुरुआती फिरौती कॉल इंडोनेशिया के एक नंबर से आने की जानकारी सामने आई थी, जिसके बाद जांच को अंतरराष्ट्रीय एंगल से भी देखा गया। हालांकि, फिलहाल पुलिस का मुख्य फोकस बिहार के संगठित अपहरण गिरोहों पर केंद्रित है।

 

सूत्रों के अनुसार, इस वारदात के पीछे बिहार के कुख्यात अपहरण गिरोहों—अजय सिंह गैंग, चंदन सोनार उर्फ ‘किडनैपिंग किंग’ या छोटू यादव गैंग—की भूमिका की आशंका जताई जा रही है। यह भी संभावना है कि स्थानीय स्तर पर कुछ लोगों ने रेकी या लॉजिस्टिक सपोर्ट उपलब्ध कराया हो। हालांकि, अभी तक किसी भी गिरोह की संलिप्तता को लेकर पुलिस को ठोस सबूत नहीं मिले हैं।

 

पुलिस कैरव गांधी की सुरक्षा को सर्वोच्च प्राथमिकता बताते हुए बेहद सतर्कता से जांच कर रही है। बिहार के कई इलाकों में लगातार छापेमारी की जा रही है और तकनीकी सर्विलांस के जरिए कॉल डिटेल रिकॉर्ड, लोकेशन और संपर्कों की गहन जांच की जा रही है। फिलहाल मामला ‘वेट एंड वॉच’ की स्थिति में है और पुलिस किसी भी जल्दबाजी से बचते हुए रणनीतिक तरीके से आगे बढ़ रही है।

 

इधर, कैरव गांधी की सुरक्षित रिहाई फिलहाल बातचीत और संभावित मध्यस्थता पर टिकी बताई जा रही है। परिवार की ओर से संयम बरतते हुए पुलिस जांच में पूरा सहयोग किया जा रहा है। इस अपहरण कांड को लेकर शहरवासियों और कारोबारी जगत में गहरी चिंता व्याप्त है। हर किसी की निगाहें अब पुलिस की अगली कार्रवाई और कैरव गांधी की सकुशल घर वापसी पर टिकी हुई हैं।