कोल्हान विश्वविद्यालय में बड़ा फेरबदल: डॉ. एस. पी. महालिक बहरागोड़ा कॉलेज के प्राचार्य बने, डॉ. राजीव कुमार को वर्कर्स कॉलेज की कमान

चाईबासा: कोल्हान विश्वविद्यालय (केयू) में शैक्षणिक और प्रशासनिक व्यवस्था को और अधिक सुदृढ़ बनाने के उद्देश्य से बड़े पैमाने पर फेरबदल किया गया है। विश्वविद्यालय प्रशासन ने प्राचार्यों, प्राचार्य-प्रभारी और शिक्षकों के स्थानांतरण के साथ-साथ कक्षाओं के असाइनमेंट एवं रद्दीकरण से जुड़ा विस्तृत आदेश जारी किया है। झारखंड राज्य विश्वविद्यालय अधिनियम 2000 की धारा 10(14) एवं 10(16) के तहत जारी यह आदेश 27 जनवरी 2026 से प्रभावी होगा। इस आदेश के तहत विभिन्न कॉलेजों के कुल 18 शिक्षकों और प्रशासकों की नई पदस्थापना और जिम्मेदारियां तय की गई हैं।

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जारी सूची के अनुसार, डॉ. संजय कुमार सिंह को घाटशिला कॉलेज से स्थानांतरित कर जमशेदपुर को-ऑपरेटिव कॉलेज भेजा गया है। हालांकि वे कोल्हान विश्वविद्यालय में वित्त पदाधिकारी के रूप में प्रतिनियुक्ति पर बने रहेंगे। वहीं, जमशेदपुर वर्कर्स कॉलेज के प्राचार्य डॉ. एस. पी. महालिक को स्थानांतरित करते हुए बहरागोड़ा कॉलेज का नया प्राचार्य नियुक्त किया गया है। विश्वविद्यालय प्रशासन को उम्मीद है कि उनके अनुभव से बहरागोड़ा कॉलेज की शैक्षणिक और प्रशासनिक स्थिति मजबूत होगी।

 

इसी क्रम में डॉ. बलकृष्ण बेहड़ा को बहरागोड़ा कॉलेज से हटाकर कोल्हान विश्वविद्यालय, चाईबासा के पीजी ओड़िया विभाग का प्राचार्य-प्रभारी बनाया गया है। वहीं, जमशेदपुर को-ऑपरेटिव कॉलेज के डॉ. राजीव कुमार को जमशेदपुर वर्कर्स कॉलेज का प्राचार्य-प्रभारी नियुक्त किया गया है, जिससे वर्कर्स कॉलेज में नए प्रशासनिक नेतृत्व की शुरुआत होगी।

 

शिक्षकों के तबादले के तहत डिग्री कॉलेज, मझगांव के डॉ. मनदेव प्रसाद को एबीएम कॉलेज, जमशेदपुर स्थानांतरित किया गया है, जबकि धनंजय कुमार सोनी को डिग्री कॉलेज, मझगांव का प्राचार्य-प्रभारी बनाया गया है।

 

इसके अलावा आदेश में कई शिक्षकों के कक्षा असाइनमेंट में बदलाव और कुछ कक्षाओं के रद्दीकरण का भी उल्लेख है। के.एस. कॉलेज, सरायकेला, एस.बी. कॉलेज, चांडिल और टाटा कॉलेज, चाईबासा जैसे संस्थानों में पहले से निर्धारित कुछ कक्षाओं को निरस्त किया गया है, जबकि कुछ शिक्षकों को सप्ताह के निर्धारित दिनों में अन्य कॉलेजों में कक्षाएं लेने की जिम्मेदारी सौंपी गई है।

 

विश्वविद्यालय प्रशासन के अनुसार यह व्यापक प्रशासनिक फेरबदल कॉलेजों में शैक्षणिक संतुलन बनाए रखने, संसाधनों के बेहतर उपयोग और विद्यार्थियों को गुणवत्तापूर्ण शिक्षा उपलब्ध कराने के उद्देश्य से किया गया है। शैक्षणिक हलकों में इस फैसले को महत्वपूर्ण माना जा रहा है और आने वाले सत्र में इसके सकारात्मक परिणाम देखने की उम्मीद जताई जा रही है।