खाड़ी देशों में बढ़ते तनाव का असर अब भारत की रसोई तक पहुंचने लगा है। एलपीजी (रसोई गैस) की सप्लाई पर बड़ा संकट मंडरा रहा है। होर्मुज स्ट्रेट से होकर आने वाले गैस टैंकरों की संख्या में भारी गिरावट दर्ज की गई है, जिससे देश में गैस का स्टॉक तेजी से घट रहा है।

मौजूदा हालात में भारत की रोजाना एलपीजी खपत करीब 93,500 टन है, लेकिन आयातित गैस समय पर नहीं पहुंच पा रही। ताजा रिपोर्ट्स के मुताबिक, हाल ही में केवल दो जहाज 92,700 टन गैस लेकर भारत पहुंचे—जो देश की महज एक दिन की जरूरत के बराबर है। कई भारतीय टैंकर अब भी पर्शियन गल्फ में फंसे हुए हैं।
14.2 किलो सिलेंडर में अब सिर्फ 10 किलो गैस?
संकट से निपटने के लिए ऑयल मार्केटिंग कंपनियां बड़ा कदम उठाने की तैयारी में हैं। योजना के तहत 14.2 किलो वाले घरेलू सिलेंडर में सिर्फ 10 किलो गैस भरकर सप्लाई की जा सकती है। इसका उद्देश्य सीमित स्टॉक को ज्यादा से ज्यादा उपभोक्ताओं तक पहुंचाना है।
अधिकारियों का मानना है कि इससे वितरण व्यवस्था लंबे समय तक जारी रखी जा सकेगी और किसी एक क्षेत्र में पूरी तरह गैस खत्म होने की स्थिति से बचा जा सकेगा।
कीमत में भी होगा बदलाव
अगर यह व्यवस्था लागू होती है, तो उपभोक्ताओं को राहत भी मिल सकती है। सिलेंडर पर विशेष स्टिकर लगाए जाएंगे, जिसमें गैस की मात्रा स्पष्ट लिखी होगी। ग्राहकों से केवल 10 किलो गैस के हिसाब से ही कीमत ली जाएगी, यानी प्रति सिलेंडर खर्च कम होगा।
सरकार सतर्क, बचत की अपील संभव
भारत अपनी लगभग 60% एलपीजी जरूरत आयात से पूरी करता है, इसलिए अंतरराष्ट्रीय तनाव का सीधा असर पड़ता है। घरेलू उपयोग में ही कुल एलपीजी का करीब 86% खर्च होता है, जिससे सरकार इस मामले में बेहद सावधानी बरत रही है।
हालांकि पेट्रोलियम मंत्रालय ने फिलहाल सप्लाई सामान्य रहने का दावा किया है, लेकिन हालात को देखते हुए आने वाले दिनों में उपभोक्ताओं से गैस के विवेकपूर्ण उपयोग की अपील की जा सकती है।