जमशेदपुर: शहर के गोलमुरी इलाके से इंसानियत को झकझोर देने वाली एक दर्दनाक घटना सामने आई है। जमशेदपुर की रहने वाली 80 वर्षीय सविन्दर सिंह की बुधवार सुबह ठंड लगने से मौत हो गई। सड़कों पर संघर्ष करते हुए दम तोड़ने वाली सविन्दर सिंह की कहानी न सिर्फ एक बुज़ुर्ग महिला की त्रासदी है, बल्कि समाज की संवेदनहीनता पर भी गंभीर सवाल खड़े करती है।

बताया जाता है कि सविन्दर सिंह के पति और उनके दो बच्चों की पहले ही मौत हो चुकी थी। जीवन के इस अंतिम पड़ाव पर उन्हें परिवार के सहारे की जरूरत थी, लेकिन दुर्भाग्यवश जिस घर को उन्होंने अपने खून-पसीने से बसाया, उसी घर से उनकी बहू ने उन्हें बाहर निकाल दिया। घर से बेघर होने के बाद मजबूरी में उन्होंने सड़कों को ही अपना ठिकाना बना लिया।
कभी फुटपाथ पर, तो कभी किसी दुकान या इमारत के कोने में रात गुज़ारते हुए सविन्दर सिंह ठंड, भूख और अकेलेपन से जूझती रहीं। उम्र के इस दौर में जहां एक माँ को परिवार का स्नेह और सुरक्षा मिलनी चाहिए थी, वहां उन्हें समाज की बेरुख़ी और अपनों की बेदर्दी का सामना करना पड़ा।
स्थानीय लोगों के अनुसार, सविन्दर सिंह लंबे समय से बीमार भी चल रही थीं। टाटा टिनप्लेट कंपनी के मेडिकल कार्ड के सहारे किसी तरह उनका इलाज चल रहा था, लेकिन मानसिक पीड़ा और बेसहारा जीवन ने उन्हें भीतर से तोड़ दिया था।
बुधवार सुबह करीब 11 बजे गोलमुरी बाजार स्थित अड्डा बार के नीचे कुर्सी पर बैठे-बैठे ठंड लगने से उनकी मौत हो गई। मौके पर न कोई अपना मौजूद था और न ही कोई ऐसा जो अंतिम समय में उनका हाथ थाम सके। सूचना मिलने पर स्थानीय लोगों और पुलिस ने शव को कब्जे में लेकर आगे की प्रक्रिया शुरू की।
सविन्दर सिंह की मौत ने समाज को आईना दिखा दिया है, जहां माँ-बाप को बोझ समझा जाने लगा है। यह घटना सिर्फ एक बुज़ुर्ग महिला की मौत नहीं, बल्कि सामाजिक मूल्यों के क्षरण की एक मार्मिक तस्वीर है।