देवघर: देवभूमि देवघर अब अपनी धार्मिक पहचान के साथ-साथ पारंपरिक व्यंजनों के लिए भी सुर्खियों में है। यहां का प्रसिद्ध व्यंजन ‘अट्ठे मटन’ जल्द ही जीआई (ज्योग्राफिकल इंडिकेशन) टैग हासिल कर सकता है। इसे लेकर चल रही प्रक्रिया लगभग पूरी हो चुकी है, जिससे इस खास डिश को राष्ट्रीय ही नहीं, बल्कि अंतरराष्ट्रीय पहचान मिलने की उम्मीद है।

अट्ठे मटन की रेसिपी इसे बाकी मटन डिश से बिल्कुल अलग बनाती है। इस व्यंजन में न तो प्याज का उपयोग होता है, न लहसुन का और न ही पानी डाला जाता है। शुद्ध घी में लोहे की कड़ाही में मटन को करीब तीन घंटे तक धीमी आंच पर पकाया जाता है। इस दौरान मटन अपने ही रस में गलकर तैयार होता है, जिससे इसका स्वाद और खुशबू बेहद खास बन जाती है।
देवघर का अट्ठे मटन अपने लाजवाब स्वाद और खुशबू के कारण मटन प्रेमियों के बीच खास पहचान रखता है। परंपरा के अनुसार इसे मिट्टी के कुल्हड़ में परोसा जाता है, जो इसकी देसी पहचान को और मजबूत करता है। लंबे समय से यह व्यंजन स्थानीय लोगों के साथ-साथ बाहर से आने वाले श्रद्धालुओं और पर्यटकों की भी पसंद बना हुआ है।
जीआई टैग की सूची में देवघर के अट्ठे मटन के अलावा झारखंड के अन्य पारंपरिक उत्पाद भी शामिल किए गए हैं। इनमें सरायकेला जिले की ‘कुचाई हल्दी’, सिमडेगा का ‘बीरू गमछा’, सिमडेगा की मीठी इमली और खूंटी जिले की ‘करणी शॉल’ प्रमुख हैं।
विशेषज्ञों के अनुसार जीआई टैग मिलने से इन उत्पादों की ब्रांड वैल्यू बढ़ेगी, स्थानीय कारीगरों और व्यवसायियों को लाभ मिलेगा और झारखंड की समृद्ध सांस्कृतिक विरासत को वैश्विक मंच पर पहचान मिलेगी।