पटना: बिहार की राजधानी पटना से एक बेहद चौंकाने वाला मामला सामने आया है, जिसने होटल और रेस्टोरेंट इंडस्ट्री की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। एक जांच में खुलासा हुआ है कि LPG की किल्लत और बढ़ती लागत के बीच कुछ होटल और ढाबे श्मशान घाटों से बचे कोयले और अधजली लकड़ियों का इस्तेमाल तंदूर में कर रहे हैं।

क्या है पूरा मामला?
रिपोर्ट के मुताबिक, गंगा नदी के किनारे स्थित पटना के कई श्मशान घाटों से रोजाना सैकड़ों किलो अधजली लकड़ियां और कोयला इकट्ठा किया जा रहा है। इन्हें बाद में छांटकर और सुखाकर होटल-रेस्टोरेंट्स तक सप्लाई किया जाता है।
इसी कोयले पर तंदूरी रोटी, चिकन, कबाब और अन्य खाद्य पदार्थ तैयार किए जा रहे हैं, जो सीधे तौर पर लोगों की सेहत से जुड़ा गंभीर मामला है।
क्यों बढ़ा यह चलन?
बताया जा रहा है कि हाल के दिनों में LPG की कीमतों और आपूर्ति में अस्थिरता के कारण छोटे होटल और ढाबे सस्ते विकल्प तलाश रहे हैं। श्मशान से मिलने वाला यह कोयला बेहद कम कीमत पर उपलब्ध हो जाता है, जिससे लागत में भारी कमी आती है।
स्वास्थ्य और धार्मिक भावनाओं पर असर
विशेषज्ञों का मानना है कि इस तरह के कोयले का उपयोग न सिर्फ अस्वच्छ है, बल्कि इससे खाने की गुणवत्ता और स्वास्थ्य पर भी नकारात्मक प्रभाव पड़ सकता है।
इसके अलावा, श्मशान से जुड़ी धार्मिक संवेदनाओं के कारण यह मामला लोगों की भावनाओं को भी आहत कर सकता है।
प्रशासन की भूमिका पर सवाल
स्थानीय लोगों का आरोप है कि यह पूरा खेल लंबे समय से चल रहा है, लेकिन प्रशासन की ओर से कोई ठोस कार्रवाई नहीं की गई है। खाद्य सुरक्षा विभाग और नगर निगम की निगरानी पर भी सवाल उठ रहे हैं।
क्या हो सकती है कार्रवाई?
सूत्रों के अनुसार, मामले के उजागर होने के बाद संबंधित विभागों ने जांच शुरू कर दी है। दोषी पाए जाने पर होटल संचालकों और सप्लायरों पर सख्त कार्रवाई की जा सकती है।