जमशेदपुर को-ऑपरेटिव कॉलेज छात्रावास परिवार द्वारा अगामी 9 फरवरी, 2025 को 12वां मागे मिलन समारोह का आयोजन

Jamshedpur: जमशेदपुर को-ऑपरेटिव कॉलेज छात्रावास की ओर से प्रत्येक वर्ष की भांति इस वर्ष भी 12वां मागे मिलन समारोह का सफलता पूर्वक आयोजन को लेकर विशेष बैठक बुलायी गयी। यह कार्यक्रम 9 फरवरी 2025, रविवार को दोपहर 12 बजे से जमशेदपुर को-ऑपरेटिव कॉलेज में आयोजित किया जाएगा।

समारोह में इस बार लगभग 5000 हजार की जनसंख्या में शिक्षकगण,शिक्षकेत्तर कर्मचारी,अभिभावकगण,समाज के बुध्दिजीवी, समाजसेवी, समाज के सभी गणमान्य लोग तथा झारखंड और अन्य राज्यों के विश्वविद्यालयों एवं कॉलेजों के छात्र अपने पारंपरिक पोशाक में आ रहे हैं| इस बैठक में मुख्य मगे दिऊरी- सुरजा पुरती,धनेश्वर ईचागुटु एवं अध्यक्ष-बुधन हेम्ब्रम और छात्रावास के अजय होनहागा,मनोरंजन हेम्ब्रम,हरि नारायण होनहागा,गुमान सरदार, राजू मुर्मू,रवि पुरती,जीत मोहन गोप, शिबू रजक,बयान लागुरी,मार्शल आल्डा,महेश हेम्ब्रम,दिनेश हेम्ब्रम आदि उपस्थित थे|

कार्यक्रम की रूपरेखा:

दोपहर 12:00 बजे से 03:00 बजे तक: दिऊरियों द्वारा देशाउलि में “मगे बोंगा” संपन्न।

दोपहर 03:00 बजे से 04:00 बजे तक: अतिथियों का आगमन, स्वागत सह सम्मान, गोवारि, संबोधन, सेल्फी पॉइंट का उद्घाटन और पारंपरिक वाद्ययंत्र दामा-दुमंग् बजाकर व मगे नृत्य कर कार्यक्रम का शुभारंभ।

शाम 04:00 बजे से 08:00 बजे तक: भोग वितरण, पारंपरिक वाद्ययंत्रों के सामूहिक मागे नृत्य और गीत एवं बेस्ट ड्रेस कोड के विजेताओं को सम्मानित किया जाएगा।

रात 08:00 बजे: मागे मिलन समारोह के अध्यक्ष श्री बुधन हेम्ब्रम एवं मुख्य मागे दिऊरी श्री सुरजा पुरती द्वारा विधिवत् रूप से धन्यवाद ज्ञापन सह समापन की घोषणा ।

मागे पर्व का महत्व:

हो जनजाति में मागे पर्व को “सृष्टि का पर्व” के रूप में मानाया जाता है। हो जनजाति के मतानुसार, पोरोब् यानि पर्व चुम्बकीय ऊर्जा के धनात्मक आवेश (उत्तर दिशा) और ऋणात्मक आवेश (दक्षिण दिशा) से मिलकर बना है। हो समुदाय के अनुसार, इस संसार में जितने भी जीवधारी होते हैं, वे पांच प्रकार के ही होते हैं:- उपन रोवा, जपन रोवा, जोनोम रोवा, जतेन रोवा और रुतुइ रोवा। इन पांच प्रकार के जीवों की सुरक्षा एवं मंगल कामना के लिए ही “मागे पर्व” का त्योहार मनाया जाता है।

उद्देश्य:

आज के समय में, अपने गाँव-घर से दूर रहकर शहरों के विभिन्न कॉलेजों में पढ़ाई कर रहे छात्र अपने पारंपरिक त्योहारों और सांस्कृतिक दस्तूरों से दूर होते जा रहे हैं। हो जनजाति के बच्चे अपनी सभ्यता, संस्कृति और पर्व-त्योहारों की प्राचीन महत्ता को न भूलें, इसलिए इस एक दिवसीय मागे मिलन समारोह का आयोजन छात्रों के बीच किया जा रहा है।