मुंबई/बारामती: महाराष्ट्र की राजनीति से बुधवार को एक बेहद दुखद और बड़ी खबर सामने आई। राज्य के उपमुख्यमंत्री अजित पवार का बारामती में हुए एक विमान हादसे में निधन हो गया। यह हादसा उस वक्त हुआ जब उनका चार्टर्ड विमान हवाई अड्डे पर उतरने की कोशिश कर रहा था। शुरुआती जानकारी के अनुसार, लैंडिंग के दौरान विमान रनवे से फिसल गया, जिसके बाद उसमें आग लग गई।

प्रशासनिक अधिकारियों ने बताया कि हादसे के समय विमान में अजित पवार के साथ उनका निजी स्टाफ और कुछ सुरक्षाकर्मी भी मौजूद थे। दुर्घटना की सूचना मिलते ही राहत और बचाव दल तुरंत मौके पर पहुंचा, लेकिन गंभीर रूप से घायल होने के कारण किसी को भी नहीं बचाया जा सका। इस घटना के बाद पूरे क्षेत्र में आपात स्थिति लागू कर दी गई है। नागरिक उड्डयन महानिदेशालय (DGCA) ने हादसे के कारणों की जांच के आदेश दे दिए हैं।
एक राजनीतिक युग का अंत
अजित पवार के निधन के साथ ही महाराष्ट्र की सियासत का वह अध्याय समाप्त हो गया, जिसने पिछले तीन दशकों तक सत्ता के समीकरणों को प्रभावित किया। बारामती से अपने राजनीतिक सफर की शुरुआत करने वाले पवार राज्य के सबसे प्रभावशाली नेताओं में से एक थे। उनकी गिनती उन नेताओं में होती थी, जिनकी भूमिका सरकार बनाने और गिराने में हमेशा निर्णायक रही।
उन्होंने अपने राजनीतिक जीवन में वित्त, योजना, सिंचाई और ऊर्जा जैसे कई महत्वपूर्ण विभागों की जिम्मेदारी संभाली। उनके फैसलों ने राज्य की प्रशासनिक और विकास की दिशा तय करने में बड़ी भूमिका निभाई।
हमेशा चर्चा में रहे राजनीतिक फैसले
अजित पवार अपने साहसिक और अप्रत्याशित राजनीतिक फैसलों के लिए जाने जाते थे। साल 2019 में भाजपा के साथ मिलकर सुबह-सुबह उपमुख्यमंत्री पद की शपथ लेना हो या 2023 में NCP में दोफाड़ कर अपने समर्थक विधायकों के साथ शिंदे-फडणवीस सरकार में शामिल होना, उनके हर कदम ने राज्य की राजनीति में भूचाल ला दिया। इन घटनाओं ने उन्हें महाराष्ट्र की राजनीति का एक केंद्रीय चेहरा बना दिया था।
अजित पवार की राजनीतिक यात्रा
अजित पवार ने 1991 में बारामती विधानसभा सीट से चुनाव जीतकर अपने राजनीतिक करियर की शुरुआत की थी। 2009 में वे पहली बार महाराष्ट्र के उपमुख्यमंत्री बने। इसके बाद वे 2010 से 2014 तक कांग्रेस-NCP सरकार में भी इस पद पर रहे। 2019 में महाविकास आघाड़ी सरकार में उन्होंने एक बार फिर उपमुख्यमंत्री का पद संभाला। जुलाई 2023 में NCP में विभाजन के बाद वे भाजपा-शिवसेना सरकार में शामिल हुए और अपने निधन तक उपमुख्यमंत्री के पद पर कार्यरत रहे। उनके निधन की खबर से राजनीतिक गलियारों में शोक की लहर है।
ऐसा रहा सफर
1991
अजित पवार पहली बार महाराष्ट्र विधानसभा पहुंचे। बारामती सीट से विधायक चुने गए और यहीं से उनका राजनीतिक सफर शुरू हुआ।
1999–2004
कांग्रेस–एनसीपी सरकार के दौरान उन्होंने संगठन में सक्रिय भूमिका निभाई। इस समय पश्चिमी महाराष्ट्र में उनकी पकड़ मजबूत हुई।
2009
वे पहली बार महाराष्ट्र के उपमुख्यमंत्री बने। उन्हें वित्त और योजना जैसे महत्वपूर्ण विभाग सौंपे गए।
2010–2014
इस पूरे कार्यकाल में वे उपमुख्यमंत्री पद पर बने रहे। सिंचाई और सहकार से जुड़े फैसलों को लेकर वे अक्सर चर्चा में रहे।
2014
सरकार बदलने के बाद एनसीपी विपक्ष में चली गई। इस दौरान अजित पवार पार्टी के प्रमुख नेताओं में शामिल रहे।
2019 (नवंबर)
उन्होंने भाजपा के साथ मिलकर सरकार बनाई और उपमुख्यमंत्री पद की शपथ ली, लेकिन यह सरकार कुछ ही दिनों में गिर गई।
2019–2022
इसके बाद बनी महाविकास आघाड़ी सरकार में वे दोबारा उपमुख्यमंत्री बने और प्रशासनिक जिम्मेदारियां संभालीं।
2023 (जुलाई)
एनसीपी में बड़ा राजनीतिक बदलाव हुआ। अजित पवार अपने समर्थक विधायकों के साथ अलग हुए और नई सरकार में शामिल हो गए।
2023–2026
वे महाराष्ट्र के उपमुख्यमंत्री के रूप में कार्य करते रहे। इस दौरान राज्य की राजनीति में उनकी भूमिका काफी अहम बनी रही।