अब स्कूल में बच्चों के साथ माता-पिता भी सीखेंगे कक-ग-घ: जमशेदपुर में साक्षरता का नया मॉडल

जमशेदपुर में शिक्षा व्यवस्था को एक नया और समावेशी स्वरूप देने की पहल की जा रही है। जिले के सरकारी स्कूलों में अब सिर्फ बच्चों की पढ़ाई नहीं होगी, बल्कि उनके माता-पिता भी स्कूल की दहलीज पर कदम रखकर अक्षर ज्ञान हासिल करेंगे। सत्र 2026-27 से जिले के सभी प्राइमरी, मिडिल और हाई स्कूलों में अभिभावकों के लिए अलग से नियमित कक्षाएं शुरू की जाएंगी। यह कार्यक्रम साक्षर भारत और हुलास योजना के तहत लागू होगा।

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योजना के अनुसार सोमवार से शनिवार तक प्रतिदिन एक घंटे अभिभावकों को पढ़ाया जाएगा। इन कक्षाओं में उन्हें अपना नाम लिखना, हस्ताक्षर करना और गणित की बुनियादी समझ दी जाएगी। जोड़, घटाव, गुणा और भाग जैसी प्राथमिक गणनाओं पर विशेष ध्यान दिया जाएगा, ताकि दैनिक जीवन में उनका आत्मविश्वास बढ़ सके।

 

कार्यक्रम को सफल बनाने के लिए स्कूल स्तर पर तैयारियां शुरू हो चुकी हैं। नामांकन प्रक्रिया के दौरान शिक्षक अपने पोषण क्षेत्र में ऐसे माता-पिता की पहचान कर रहे हैं जो निरक्षर हैं। प्रत्येक स्कूल को कम से कम 15 ऐसे अभिभावकों को चिन्हित करना अनिवार्य किया गया है। नए सत्र से विद्यार्थियों की नियमित कक्षाओं के साथ-साथ अभिभावकों की कक्षाएं भी संचालित होंगी।

 

इस अभियान में माताओं के साथ-साथ पिताओं की भागीदारी भी सुनिश्चित की गई है। महिला और पुरुष दोनों को समान रूप से शिक्षा से जोड़ा जाएगा। पढ़ाई के दौरान अभिभावकों की प्रगति का आकलन करने के लिए परीक्षाएं ली जाएंगी। मूल्यांकन के आधार पर सत्र के अंत में बेहतर प्रदर्शन करने वाले अभिभावकों को सम्मानित भी किया जाएगा।

 

विद्यार्थियों की वार्षिक परीक्षा समाप्त होने के बाद अभिभावकों की कक्षाएं शुरू होंगी। अप्रैल 2026 से शुरू होने वाले नए शैक्षणिक सत्र में बच्चों के साथ-साथ माता-पिता की नियमित पढ़ाई भी आरंभ हो जाएगी।

 

शिक्षा को केवल बच्चों तक सीमित न रखकर पूरे परिवार तक पहुंचाने की यह पहल जिले में साक्षरता बढ़ाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम मानी जा रही है। बच्चों के साथ माता-पिता के स्कूल आने से न सिर्फ साक्षरता का स्तर बढ़ेगा, बल्कि घर-परिवार में शिक्षा के प्रति सकारात्मक माहौल भी तैयार होगा।