51 साल बाद टूटी कानून की बेड़ियाँ! 4 रुपये, कलाई घड़ी और रूमाल की चोरी में फरार आरोपी को कोर्ट ने किया बरी

पुणे में न्याय व्यवस्था से जुड़ा एक हैरान कर देने वाला फैसला सामने आया है, जिसने पूरे देश का ध्यान खींचा है। वर्ष 1974 में दर्ज चोरी के एक मामूली मामले में अदालत ने 51 साल बाद आरोपी को बरी कर दिया। यह फैसला सबूतों की कमी और गवाहों के अभाव में सुनाया गया।

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यह मामला पुणे के बंडगार्डन पुलिस थाने में दर्ज हुआ था। आरोप था कि तीन लोगों ने मिलकर एक कलाई घड़ी, 4 रुपये नकद और एक रूमाल की चोरी की थी। इस मामले में गुलाब शाहू जाधव, मुकुंद केरबा वाघमारे और राजाराम तुकाराम काले को आरोपी बनाया गया था।

 

गुलाब शाहू जाधव और मुकुंद केरबा वाघमारे ने 10 अप्रैल 1975 को अपना जुर्म कबूल कर लिया था, जिसके बाद उन्हें दोषी ठहराया गया। वहीं तीसरा आरोपी राजाराम तुकाराम काले फरार हो गया और मामला दशकों तक अदालत में लंबित रहा।

 

पदभार संभालने के बाद प्रथम श्रेणी न्यायिक मजिस्ट्रेट एन. जे. चव्हाण ने पुराने और पेंडिंग मामलों की समीक्षा शुरू की। इसी दौरान यह केस फिर से सामने आया। अदालत ने शिकायतकर्ता और गवाहों को दोबारा नोटिस और वारंट जारी किए, लेकिन कोई भी कोर्ट में उपस्थित नहीं हुआ।

 

आखिरकार, 51 साल से अधिक समय तक फरार रहने के बावजूद, पुख्ता सबूतों के अभाव में कोर्ट ने 26 दिसंबर 2025 को राजाराम काले के खिलाफ जारी सभी वारंट रद्द करते हुए उन्हें बरी करने का आदेश दे दिया।

 

यह फैसला एक ओर जहां न्यायिक प्रक्रिया की जटिलताओं को उजागर करता है, वहीं यह सवाल भी खड़ा करता है कि क्या इतनी लंबी देरी के बाद मिला फैसला वास्तव में इंसाफ कहलाएगा या यह सिस्टम की विफलता की कहानी है।