झारखंड के पूर्वी सिंहभूम जिले के बहरागोड़ा क्षेत्र में बहने वाली स्वर्णरेखा नदी एक बार फिर चर्चा में है। नदी से कथित तौर पर द्वितीय विश्व युद्ध के समय का एक जिंदा बम मिलने से पूरे इलाके में सनसनी फैल गई है। स्थानीय लोगों के बीच भय का माहौल है, वहीं प्रशासन भी अलर्ट मोड में आ गया है।

प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार, नदी किनारे मछली पकड़ने गए कुछ लोगों की नजर एक भारी और संदिग्ध वस्तु पर पड़ी। पास जाकर देखने पर यह बम जैसा प्रतीत हुआ। इसके बाद इलाके में खबर तेजी से फैल गई। इसी बीच एक वायरल वीडियो सामने आया है, जिसमें कुछ लोग बिना किसी सुरक्षा उपाय के इस बम को नदी में घसीटते नजर आ रहे हैं—जो बेहद खतरनाक और लापरवाही भरा कदम माना जा रहा है।
बार-बार बम मिलने से गहराया रहस्य
यह पहली बार नहीं है जब स्वर्णरेखा नदी से इस तरह का विस्फोटक मिला हो। पिछले कुछ वर्षों में भी इस क्षेत्र से पुराने बम मिलने की घटनाएं सामने आ चुकी हैं। इससे यह सवाल उठने लगा है कि क्या इस इलाके का द्वितीय विश्व युद्ध के दौरान कोई सैन्य महत्व रहा है?
इतिहासकारों और जानकारों का मानना है कि उस दौर में पूर्वी भारत के कई हिस्सों का इस्तेमाल सैन्य गतिविधियों, हथियारों के भंडारण या ट्रांजिट रूट के रूप में किया जाता था। हालांकि बहरागोड़ा और इसके आसपास के क्षेत्रों को लेकर अब तक कोई स्पष्ट दस्तावेज सामने नहीं आया है।
सतह पर क्यों आ रहे हैं पुराने बम?
विशेषज्ञों का कहना है कि नदी के जलस्तर में बदलाव, कटाव, बाढ़ या अवैध रेत खनन जैसी गतिविधियों के कारण वर्षों से दबे विस्फोटक अब सतह पर आ सकते हैं। इससे ऐसे खतरनाक अवशेषों के मिलने की संभावना बढ़ जाती है।
प्रशासन की अपील
घटना के बाद स्थानीय प्रशासन और पुलिस ने लोगों से अपील की है कि किसी भी संदिग्ध वस्तु को छूने या उसके पास जाने से बचें और तुरंत इसकी सूचना दें। बम निरोधक दस्ते को बुलाकर सुरक्षित तरीके से उसे निष्क्रिय करना ही एकमात्र सही तरीका है।
बड़ा सवाल अब भी कायम
लगातार मिल रहे इन बमों ने कई सवाल खड़े कर दिए हैं—क्या यह इलाका कभी गुप्त सैन्य ठिकाना रहा था? या फिर युद्धकाल में यहां हथियारों को छिपाया गया था? फिलहाल इन सवालों के जवाब तलाशने के लिए गहन जांच की जरूरत है।